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नारी का जीवन

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विभूतिस्त्यागहीनेव सत्यहीनेव भारती । विद्या प्रशमहीनेव न भाति स्त्री पतिं विना ।। ( रामायणमञ्जरी, बा.का. १/८७६) जैसे त्याग से रहित ऐश्वर्य, सत्य से रहित वाणी, शम से रहित विद्या सुशोभित नहीं होती, उसी प्रकार पति के बिना स्त्री सुशोभित नहीं होती । योगाचार्य डॉक्टर प्रवीण कुमार शास्त्री