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नारी का जीवन

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विभूतिस्त्यागहीनेव सत्यहीनेव भारती । विद्या प्रशमहीनेव न भाति स्त्री पतिं विना ।। ( रामायणमञ्जरी, बा.का. १/८७६) जैसे त्याग से रहित ऐश्वर्य, सत्य से रहित वाणी, शम से रहित विद्या सुशोभित नहीं होती, उसी प्रकार पति के बिना स्त्री सुशोभित नहीं होती । योगाचार्य डॉक्टर प्रवीण कुमार शास्त्री

झूठ बोलने का कुपरिणाम

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" शतमश्वानृते हन्ति सहस्रं तु गवानृते । आत्मानं स्वजनं हन्ति पुरुषः पुरुषानृते ।।" ( वाल्मीकि रामायण, किष्किन्धा काण्ड ३४/९) घोड़े के लिए जो मिथ्या (झूठ) बोलता है, उसे सौ अश्वाघात का पाप लगता है । गौ के लिए जो झूठ बोलता है, उसे सहस्र (हजार) गौहत्या का पाप लगता है । पुरुष के संबंध में जो असत्य बोलता है, वह अपना तथा अपने बंधु बांधों का भी नाश करता है । योगाचार्य डॉक्टर प्रवीण कुमार शास्त्री